Category: विधा

दक्षिण, मध्य और पूर्व एशिया में हिंदी शिक्षण: समस्याएँ और सुझाव – (आलेख)

दक्षिण, मध्य और पूर्व एशिया में हिंदी शिक्षण: समस्याएँ और सुझाव डॉ. ज्ञान प्रकाश विजिटिंग प्रोफेसर, हांगुक यूनिवर्सिटी ऑफ़ फॉरेन स्टडीज़ (HUFS),सिओल, दक्षिण कोरिया ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना से संचालित…

दक्षिण कोरिया में “बुद्धं शरणं गच्छामि!” – (आलेख)

दक्षिण कोरिया में “बुद्धं शरणं गच्छामि!” डॉ. संजय कुमार, दक्षिण कोरिया बिहार स्थित गया (जिसका नया नामकरण गया जी किया गया है) मेरी पुश्तैनी धरती रही है। गया बौद्ध धर्म…

आधुनिकता बनाम परंपरा  – (लघुकथा)

– डॉ सुनीता शर्मा पहचान रेलवे स्टेशन के कोने में बैठी थी वह—रंग-बिरंगे कपड़ों में, आँखों में काजल, पर चेहरा बुझा हुआ। लोग आते-जाते रहे। कोई उसे टालकर निकला, कोई…

आधुनिकता बनाम परंपरा  – (लघुकथा)

– डॉ सुनीता शर्मा आधुनिकता बनाम परंपरा सिया ने अपनी डाइट का चार्ट बड़े ही मनोयोग से तैयार किया। गूगल खंगाला, विदेशी न्यूट्रिशनिस्ट के वीडियो देखे और आखिरकार एक नामी…

जन्मोत्सव  – (लघुकथा)

– डॉ सुनीता शर्मा जन्मोत्सव रीमा के हाथ काँप उठे जब उसने बेटी दीपिका की वीडियो कॉल उठाई। अस्पताल के सफेद कमरे में, थकी-सी दीपिका की गोद में नन्हा बच्चा…

मंच से घर तक  – (लघुकथा)

मंच से घर तक – डॉ सुनीता शर्मा नेता जी आज मंच पर पूरे जोश में थे। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का शुभ अवसर था, और वे गरज-गरजकर नारी शक्ति की…

एक छोटी सी बात… – (कहानी)

– डॉ सुनीता शर्मा, न्यूजीलैंड एक छोटी सी बात… आज जब मैं घर लौटी, तो बगल की बिल्डिंग से कुछ असामान्य शोर सुनाई दिया। निकोला — वहीं रहने वाली महिला…

अंग्रेजी माध्यम : दोषी कौन – (विचार स्तंभ)

अंग्रेजी माध्यम : दोषी कौन – डॉ. अशोक बत्रा, गुरुग्राम निसंदेह नन्हे-नन्हे बच्चों से नन्हीं-सी आयु में अपनी भाषा छुड़वाकर किसी विदेशी भाषा में पढ़वाना डायलिसिस जैसा कष्टकारी है। भाषांतरण…

दाढ़ी – (व्यंग्य)

दाढ़ी – रवि ऋषि मेरी जो गिनी चुनी आदतें मेरी पत्नी को पसंद हैं, उनमे मेरी बढ़ी हुई दाढ़ी नहीँ है। और सफेद दाढ़ी तो बिलकुल नहीँ। जबकि हमें दाढ़ी…

रीत इस दुनिया की – (कविता)

संगीता शर्मा, कनाडा *** रीत इस दुनिया की दुनिया बनाने वाले ये भी तूने क्या रीत बनाईभेज दी जाती हैं गैरों के,अपनी जाईहंस खेल रही होतीं हैं अपनों के बीचकर…

वक़्त – (कविता)

– संगीता शर्मा, कनाडा वक़्त सुन्दर वक़्त तो ऐसे बह निकलता हैजिस तरह घटायें हवाओं के साथहर पल, फुरती से बनता चला जाता है कलसमय रुकता नहीं, रेत जैसे जाता…

अपना शहर – (कविता)

संगीता शर्मा, कनाडा अपना शहर उस शहर की खासियत तो उस शहर की बेटी से पूछेंजो साल भर के इंतज़ार के बाद पहुँच पाती होउस शहर, जहाँ वो पली बढ़ी…

बदलाव की परछाई – (कहानी)

बदलाव की परछाई डॉ सुनीता शर्मा, न्यूजीलैंड रमेश, संस्कृत का अध्यापक, दिल्ली से दूर एक छोटे कस्बे के कन्या विद्यालय में नियुक्त हुआ। यह नौकरी उसकी काबिलियत का सम्मान तो…

शस्य श्यामला वितान – (कविता)

– डॉ० अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’, प्रयागराज शस्य श्यामला वितान (श्येनिका छंद-२१२ १२१ २१२ १२) शस्य श्यामला वितान है धरा।उर्वरा स्वदेश है हरा भरा॥हैं उपत्यका नवीन वेश में।मेखला विराजमान देश में॥…

जल ही जीवन – (कविता)

डॉ. मंजु गुप्ता जल ही जीवन बहता पानी नदिया हैझरता पानी झरनाबरसता है तो बारिशआँखों में डबडबाए तो आँसूफूल पंखुरी पर लरजती ओस की बूँदजमकर हिमशिला, फ्रीजर में रख दो…

पुरुष नहीं रोते – (कविता)

डॉ. मंजु गुप्ता पुरुष नहीं रोते तुम रोती हो, हँसती हो, खुलकर अपनी बात कहती होतारसप्तक में, कोई बात पसंद न आने पर, गुस्सा करती हो,खीजती हो, झल्लाती हो, बर्तन…

रोबोट: एक शब्द की अनोखी यात्रा – (आलेख)

रोबोट: एक शब्द की अनोखी यात्रा ~ विजय नगरकर, अहिल्यानगर, महाराष्ट्र 1920 का साल, जब चेक लेखक कारेल चापेक ने अपनी नाटकीय कृति R.U.R. (रॉसुम्स यूनिवर्सल रोबोट्स) के माध्यम से…

घाट – (कविता)

– डॉ. गौतम सचदेव, ब्रिटेन घाट चल रहा हूंनित्य मैं कांवर उठाएढो रहा हूंनित्य प्यासे अंध तापसजनक-जननी काल एवं कामना कोसामने लहरा रहा तालाबजिसमें तृप्त होने को छलकती लालसाएंऔर पक्का…

अलविदा दिल्ली, तुम्हारा आसमां – (कविता)

– डॉ. गौतम सचदेव, ब्रिटेन अलविदा दिल्ली, तुम्हारा आसमां अलविदा दमघोंट जहरीला धुंआअलविदा फैशन भरी तन्हाइयांअलविदा मतलब भरी रुसवाइयांअलविदा मेले नुमाइश शोरगुलअलविदा बेकार के जल्से बिगुलअलविदा दिल्ली की जिंदा महफिलेंअलविदा…

लंदन के फुटपाथ-शायी – (कविता)

डॉ. गौतम सचदेव, ब्रिटेन लंदन के फुटपाथ-शायी शंख औंधे जा पड़े इस-उस किनारेलहर के छोड़े हुए सूने पिटारे भूख कुतिया-सी न छोड़े साथ इनकाचुन रहे पत्तल फिंकी से नमकपारे राज…

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