Author: वैश्विक हिंदी परिवार

मंदिरों के आलोक में – पुनः वारंगल (2) – (यात्रा संस्मरण)

मंदिरों के आलोक में – पुनः वारंगल वरुण कुमार “रह न जाए मेरी-तेरी बात आधी…” मन को संतोष न था। इतनी चीजें देखी और सोची थीं, किंतु अभिव्यक्ति एक ही…

राजभाषा संस्मरण – (संस्मरण)

राजभाषा संस्मरण ~ विजय नगरकर, महाराष्ट्र हमारे ज़िले के उस शांत और नैसर्गिक ग्रामीण क्षेत्र में स्थित महाविद्यालय का वातावरण आज भी मेरी स्मृति में ताज़ा है। मुझे वहाँ हिंदी…

हिंदी राइटर गिल्ड, कनाडा द्वारा रामनवमी के अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम- ‘राम तुम्हारे अनंत आयाम’ – (यू-ट्यूब)

https://www.youtube.com/watch?v=aKND2GkSeRI

अपनी राह की अन्वेषक – (संस्मरण)

अपनी राह की अन्वेषक -प्रेम जन्मेजय 1969 में दिल्ली विश्वविद्यालय की आर्टस फैक्लटी में मेरे साहित्यिक व्यक्तित्व का निर्माण करने वाले शिक्षाकाल का आंरभ हुआ तो लगा कि कुएं से…

लिस्बन विश्वविद्यालय, पुर्तगाल में ‘विश्व रंग अंतरराष्ट्रीय हिंदी ओलम्पियाड-2025 का पोस्टर हुआ लोकार्पित – (रिपोर्ट)

लिस्बन विश्वविद्यालय, पुर्तगाल में ‘विश्व रंग अंतरराष्ट्रीय हिंदी ओलम्पियाड-2025 का पोस्टर हुआ लोकार्पित लिस्बन विश्वविद्यालय, पुर्तगाल में विश्व हिंदी दिवस समारोह के अवसर पर विश्व रंग अंतरराष्ट्रीय हिंदी ओलम्पियाड-2025 के…

आदमी और कबूतर – (कविता)

अमरेन्द्र कुमार, अमेरिका आदमी और कबूतर (१) नाम देकरसभ्यता का विकासछीन करधरती और आकाशबनाये जा रहेकंक्रीट के दरबेतैयारी हो चुकी है पूरीआदमी को कबूतर बनाने की (२) कबूतरशांति का प्रतीक…

पावस – (कविता)

अमरेन्द्र कुमार, अमेरिका पावस (१) जाते-जातेसावन डाकिये नेबचे बादलों के बण्डल कोबढ़ा दिया भादों कोताकि धरती परजल का वितरणहोता रहे निरंतर-निर्बाध| (२) सूरज साहब के नामधूप की छुट्टियों की अर्जीबंद…

समय सबसे बड़ा छन्ना – (कविता)

अमरेन्द्र कुमार, अमेरिका समय सबसे बड़ा छन्ना समय सबसे बड़ा छन्नाठोस रह जाता हैतरल बह जाता है. मौन सबसे बड़ा संवादकोलाहल से आगेअनकहा कह जाता है. दुर्ग हो असत्य काचाहे…

आत्मा की अदालत – (कविता)

अमरेन्द्र कुमार, अमेरिका आत्मा की अदालत ईमान के लिए अगरबिगाड़ की बात करोगे?अपनी बर्बादी का गड्ढाक्या खुद खोदोगे? किसी का कुछ जायेगा नहींअपना नुकसान आप भरोगे अलगू चौधरी के कामजुम्मन…

मनाली के इग्लू – (यात्रा संस्मरण)

मनाली के इग्लू (दूसरा दिन) मनोज श्रीवास्तव ‘अनाम’ 22 जनवरी 2021 ऊंघते पहाड़ों के बीच घुमावदार सड़कों पर बस आगे बढ़ती अपने पीछे जंगल, बस्ती एवं छोटी – छोटी दुकानों…

एक दिन सुबह – (कहानी)

एक दिन सुबह अमरेन्द्र कुमार, अमेरिका अपनी नौकरी से रिटायर होने के बाद एक एकदम नये और अंजाने शहर में बसने का फैसला मेरा ही था। फैसलों में किसी की…

“पुस्तक हमारी मित्र” विषय पर आभासी साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन — (रिपोर्ट)

पुस्तक हमारी मित्र (वर्ल्ड ऑफ़ चिल्ड्रेन आर्ट एंड कल्चर मंच) वर्ल्ड ऑफ़ चिल्ड्रेन आर्ट एंड कल्चर व हिंदी की गूंज संस्था के सौजन्य से “पुस्तक हमारी मित्र” विषय पर एक…

विपक्ष की कलम से – (व्यंग्य)

विपक्ष की कलम से – अमरेन्द्र कुमार, अमेरिका आज तक आपने सरकार की बातें ही सुनी हैं। आज मैं विपक्ष आपसे इस लेख के माध्यम से कुछ साझा करना चाहता…

अमरेन्द्र कुमार की ग़ज़लें – (ग़ज़ल)

अमरेन्द्र कुमार, अमेरिका ग़ज़ल -1 सब दिन ही मालिक केसब दिन ही हैं अच्छे। तम के झोंके सहतेतन के ये घर कच्चे। हम भी अब हो जाएबच्चे मन के सच्चे।…

लेखनी में धार हो – (कविता)

संगीता चौबे पंखुड़ी, कुवैत ***** लेखनी में धार हो वीर रस की हो प्रचुरता, ओज का अंगार हो।हर सदी की माँग है यह, लेखनी में धार हो ।। लिख सके…

भाषा विमर्श : पूर्वोत्तर की भाषाओं और हिन्दी का पारस्परिक संबंध – (वैश्विक हिन्दी परिवार के 20 अप्रैल 2025 के कार्यक्रम की संक्षिप्त रिपोर्ट)

भाषा विमर्श : पूर्वोत्तर की भाषाओं और हिन्दी का पारस्परिक संबंध भाषा सृष्टि का वरदान है, प्रकृति का भयदान है। महान राष्ट्र भारत, भाषाओं की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है।…

यह दौड़ती भागती सड़कें – (कविता)

पंकज शर्मा, अमेरिका *** यह दौड़ती भागती सड़कें दिन रात यह जागती सड़केंकिसी को मंज़िल तक पहुंचाएंकिसी को यूँ ही भटकती सड़केंकहीं पे कन्धा दे अर्थी कोकहीं पे ढोल बजाती…

पंकज शर्मा की ग़ज़लें – (ग़ज़ल)

पंकज शर्मा, अमेरिका 1. कभी तो पूछो मुझसे भी ज़िंदा हूँ या मर गयाजो ज़िंदा है वो मैं नहीं मैं ही हूँ जो मर गया एक अधूरा रस्ता था न…

भगवद् गीता और नाट्यशास्त्र का वैश्विक सम्मान – (लेख)

भगवद् गीता और नाट्यशास्त्र यूनेस्को की मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर में शामिल प्रस्तुति- डॉ. विजय नगरकर भारत से भगवद् गीता और नाट्यशास्त्र को यूनेस्को की मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड…

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