दसरथ चला वापस गाँव – (नाटक)
दसरथ चला वापस गाँव – श्रध्दा दास, फीजी पात्र – दसरथ – गणेश का पिता गणेश – दसरथ का बेटा भागीरथ – दसरथ का छोटा भाई रामचरण – दसरथ का…
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दसरथ चला वापस गाँव – श्रध्दा दास, फीजी पात्र – दसरथ – गणेश का पिता गणेश – दसरथ का बेटा भागीरथ – दसरथ का छोटा भाई रामचरण – दसरथ का…
तिरस्कार – डॉ. पद्मेश गुप्त सिमरन को भाई नहीं बहन चाहिए। ‘लड़के बहुत गंद होते है। मारपीट, उछल कूद और चीखने चिल्लाने के अलावा उनको आता ही क्या है? घर…
– मंजु गुप्ता **** **** अंतरात्मा रूह को मारने की कोशिश तो बहुत कीमार नहीं पाए, यही मुश्किल हो गयी हैजानते हैं जनाब, बड़ी बेशर्म हैहद दर्जे की दसनंबरीमैंने इसे…
मंजु गुप्ता लड़कियाँ लड़कियाँ तो….समय की आवाज़ हैं, हृदय की धड़कन हैंफूलों की खुशबू और खुशबू का स्पन्दन हैं. पानी में लहर हैं, लहरों का नर्तन हैंसमाज की नब्ज और…
– मंजु गुप्ता *** *** प्रकृति के अंश हैं हम तितली के पंख झुलसेगौरैया गायब हुईजंगलों की आई शामतज़िंदगी घायल हुई पशु- पक्षी की कौन कहेआदमी की दुर्दशा हुईकुछ भी…
–मंजु गुप्ता एक दीपक अँधेरे के खिलाफ़ आज की रातएक दीपक जलाओउनके लिएजिनके तन रूखेमन भूखे हैं आज की रातएक दीपक जलाओअँधेरे मन मेंआँज दो ज्योति-रेखनिराश नयनों मेंऔर रख दोएक…
– मंजु गुप्ता *** *** चाँदनी ने छुआ मुझको चाँदनी ने झुआ मुझको, मैं चाँदनी हो गयीधूप ने जब छुआ तो मै रागिनी हो गईवायु ने स्पर्श कर जगाई नव…
– मंजु गुप्ता *** *** खामोशी एक नदी है खामोशी एक नदी हैभीतर बहतीउदास,शांत, निःस्वन कई बार चाँदनी रातों मेंगीत गातीतनहाई में चुपचापबरसात में अक्सरचुप्पी का बाँध तोड़झरने-सी झरती झर-झरबहुत…
थाईलैण्ड में रामकथा – शिखा रस्तोगी अयोध्या का नाम लेते ही स्मृति-पटल पर सरयू के किनारे स्थित सूर्यवंश के चक्रवर्ती सम्राटों की उस राजधानी का भव्य चित्र मुखरित होता है,…
ऋतु शर्मा ननंन पाँडे, नीदरलैंड *** *** *** 1. मेरी दुनिया ऑटिजम मेरी दुनिया अलग है, मेरी बातें अलग हैं,मैं देखता हूँ, मैं सुनता हूँ, अलग तरीके से। मेरे दिल…
चलते चलते : बरौनी स्टेशन – डॉ वरुण कुमार बरौनी। पुराने दिनों से इसकी स्मृति एक गंदे और लापरवाह स्टेशन की है जहाँ कोई कोई नियम नहीं मानता। लेकिन इस…
– रम्भा रानी (रूबी), फिजी ** *** ** *** ** प्रकृति का संदेश ये बयार की सरसराहट,ये पंक्षियो की चहचाहट,ये नदियाँ और लहरों का शोर,ये बारिश में नाचते मोर,ये प्रकृति…
– रम्भा रानी (रूबी ), फिजी **** **** जमा – पूँजी जमा- पूँजीक्या इसका अर्थबस धन – सम्पत्ति ही होता है।नहीं,जमा-पूँजी का अर्थ है –मान, सम्मान, अपमान, अनुभव,जिसे हम सँभाल…
– रम्भा रानी (रूबी), फीजी *** *** *** दीपों का पर्व दीपों का पर्व आने वाला है,हम सबको भी दीप जलाना है। मन के अंदर जो बसा हुआ,सारे अंधकार मिटाना…
– रम्भा रानी (रूबी), फीजी बस एक पहर ही बाकी है तीन पहर तो बीत गए,बस एक पहर ही बाकी है।जीवन हाथों से निकल गया,बस खाली मुट्ठी बाकी है। सब…
– रम्भा रानी (रूबी), फीजी *** *** *** बचपन की क़ुछ खट्टी -मीठी यादें आज भी मुझे बचपन की वो सब यादें जो याद आती हैं,मन खुशियों से भर जाती…
उसका नाम – आस्था नवल, वर्जीनया, यू एस ए हम अपने आस पास कितनी ही कहानियाँ बुन सकते हैं। पता नहीं कहानी बुनने की ज़रूरत होती है या कहानी पहचाननी…
अमरीका में आई.ए.एस. आस्था नवल, वर्जीनया, यू एस ए बड़े शहर के पास स्थित एक छोटा शहर अमरीका के छोटे शहर का एक मामूली-सा मोहल्ला। ऐसा मोहल्ला जिसमें रहने वाले…
देवी पूजन – आस्था नवल, वर्जीनया, यू एस ए उत्तराखण्ड के भव्य मंदिरों में से एक मंदिर के सबसे बड़े पुरोहित जी ने अपने बेटे को अंग्रेज़ी माध्यम स्कूल से…
गांधी, काका कालेलकर और हिंदी – अतुल कुमार गांधी जी जब गुजरात बस गए तो वहां जैसे जीवन जाग उठा। राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने ‘गुजरात राजकीय परिषद’ की स्थापना की। गांधी…