Category: विधा

विपक्ष की कलम से – (व्यंग्य)

विपक्ष की कलम से – अमरेन्द्र कुमार, अमेरिका आज तक आपने सरकार की बातें ही सुनी हैं। आज मैं विपक्ष आपसे इस लेख के माध्यम से कुछ साझा करना चाहता…

अमरेन्द्र कुमार की ग़ज़लें – (ग़ज़ल)

अमरेन्द्र कुमार, अमेरिका ग़ज़ल -1 सब दिन ही मालिक केसब दिन ही हैं अच्छे। तम के झोंके सहतेतन के ये घर कच्चे। हम भी अब हो जाएबच्चे मन के सच्चे।…

लेखनी में धार हो – (कविता)

संगीता चौबे पंखुड़ी, कुवैत ***** लेखनी में धार हो वीर रस की हो प्रचुरता, ओज का अंगार हो।हर सदी की माँग है यह, लेखनी में धार हो ।। लिख सके…

यह दौड़ती भागती सड़कें – (कविता)

पंकज शर्मा, अमेरिका *** यह दौड़ती भागती सड़कें दिन रात यह जागती सड़केंकिसी को मंज़िल तक पहुंचाएंकिसी को यूँ ही भटकती सड़केंकहीं पे कन्धा दे अर्थी कोकहीं पे ढोल बजाती…

पंकज शर्मा की ग़ज़लें – (ग़ज़ल)

पंकज शर्मा, अमेरिका 1. कभी तो पूछो मुझसे भी ज़िंदा हूँ या मर गयाजो ज़िंदा है वो मैं नहीं मैं ही हूँ जो मर गया एक अधूरा रस्ता था न…

‘मॉरीशस की साहित्यिक सुगंध’ – सुनीता पाहूजा – (पुस्तक परिचय)

मॉरीशस की साहित्यिक सुगंध मॉरीशस के द्वीपीय सौंदर्य में रची-बसी हिंदी साहित्य की अनूठी गंध — एक समर्पण, एक संवाद हिंद महासागर के मध्य स्थित सुरम्य द्वीप राष्ट्र मॉरीशस, जहाँ…

आरती लोकेश की नई प्रकाशित पुस्तक ‘स्याह धवल’ – (पुस्तक समीक्षा)

पुस्तक की प्रस्तावना : ‘गद्य साहित्य में विविध आयामों के इंद्रधनुष‘ हरिहर झा, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया “पुस्तक पढ़ने का आनन्द इसमें है कि जिस विषय में हमारी रुचि हो वह सब…

निर्मला जैन मैम – (संस्मरण)

निर्मला जैन मैम प्रो.रेखा सेठी हिंदी की स्त्री रचनाकारों की कतार में आलोचक बहुत कम हैं। जेंडर और साहित्य के रिश्तों की पड़ताल में एक अदृश्य-सा समझौता दिखाई पड़ता है।…

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: उर्दू और हिंदी एक भाषा, भाषा को धर्म से न जोड़ा जाए – (आलेख)

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: उर्दू और हिंदी एक भाषा, भाषा को धर्म से न जोड़ा जाए विजय नगरकर, अहिल्यानगर, महाराष्ट्र वादी: श्रीमती वर्षताई पत्नी श्री संजय बागड़ेप्रतिवादी: महाराष्ट्र राज्य…

जापान में मेरा अनुभव – (आलेख)

जापान में मेरा अनुभव रूपा सिंह, जापान मैंने जापान आने के बाद देखा कि दुनिया में ऐसा समाज भी होता है जहाँ किसी को भी किसी का कैसा भी होना…

प्रोफेसर निर्मला जैन : हमारी गुरु, हमारी संरक्षक – (संस्मरण)

प्रोफेसर निर्मला जैन : हमारी गुरु, हमारी संरक्षक मैं दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.ए. और एम.ए.(हिंदी), आर्थिक परिस्थितियोंवश सांध्यकालीन संस्थानों से ही कर पाया था। दिन के समय नौकरी करनी पड़ी…

जापानी एनीमेशन स्टूडियो जिबली की फिल्में – (आलेख)

जापानी एनीमेशन स्टूडियो जिबली की फिल्में डॉ वेदप्रकाश सिंह, ओसाका विश्वविद्यालय, जापान ओसाका विश्वविद्यालय में हिंदी पढ़ाते हुए अपने जापानी विद्यार्थियों से उनकी किसी पसंदीदा जापानी फिल्म का नाम पूछता…

प्रवासियों की कहानियाँ और व्यथाएँ : प्रवासियों का विश्व – (पुस्तक समीक्षा)

प्रवासियों की कहानियाँ और व्यथाएँ : प्रवासियों का विश्व विजय नगरकर, अहिल्यानगर, महाराष्ट्र इस विशाल पृथ्वी के खंडित भूभागों पर अंकित मानव सभ्यता के पदचिह्न मानो उसकी सार्वकालिक भ्रमंती (घुमक्कड़ी)…

विस्मित है ये प्रश्न अभी तक – (कविता)

डॉ० अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश विस्मित है ये प्रश्न अभी तक (नवगीत – मात्राभार १६, १२) विस्मित है ये प्रश्न अभी तककिसने नींद चुराई? मृग-मरीचिका सी है लिप्सा,इसके…

पतझड़-सा है जीवन मेरा – (कविता)

डॉ० अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश पतझड़-सा है जीवन मेरा (सार छंद आधारित गीत) खुशियाँ सारी झुलस रही हैं,जीवन में निर्झर दो।पतझड़-सा है जीवन मेरा,उसको सावन कर दो॥ दुख…

फागुन आ धमका – (कविता)

डॉ० अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश फागुन आ धमका (दुर्मिल सवैया छंद आधारित गीत) अधरों पर गीत सजे जबहीं,समझो तब फागुन आ धमका।मन के अँगना करताल बजे,तब ताल तरंगित…

जहर बाँट कर क्या तू पाया – (कविता)

डॉ० अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश जहर बाँट कर क्या तू पाया (नवगीत – मात्राभार १६,१२) जहर बाँट कर क्या तू पाया,चिंतन कर तू मन में। छेड़-छाड़ करता कुदरत…

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की भाषा नीति – (शोध आलेख)

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की भाषा नीति ~ विजय नगरकर, अहिल्यानगर, महाराष्ट्र डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर, जिन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया और जो भारतीय संविधान के मुख्य वास्तुकार थे, ने…

व्याकरण और लोक-प्रचलन के बीच का द्वंद्व – (विचार स्तंभ)

व्याकरण और लोक-प्रचलन के बीच का द्वंद्व – सृजन कुमार, बुसान यूनिवर्सिटी ऑफ फॉरेन स्टडीज कुछ दिनों पहले फेसबुक पर एक पोस्ट से आँखें दो-चार हो गईं। हालाँकि मैं फेसबुक…

  भारतीय प्राचीन ज्ञान-परंपरा में प्रसव पूर्व मनोविज्ञान (Prenatal Psychology) – (आलेख)

भारतीय प्राचीन ज्ञान-परंपरा में प्रसव पूर्व मनोविज्ञान (Prenatal Psychology) – यूरी बोत्वींकिन, हिंदी शिक्षक एवं भारतविद्, तरास शेव्चेंको कीव राष्ट्रीय विश्वविद्यालय, यूक्रेन “ज्ञान ही शक्ति है” – मेरी मातृभाषा यूक्रेनी…

Translate This Website »