सुनो अमीनी – (कविता)
सुनो अमीनी दरख़्त की डाल…ऊंची फुनगी पे बैठीगौरैया से बतियातीअपनी जिज्ञासा रोक नहीं पायी…इक दिन सवाल कर ही बैठी… उड़ान के हौंसलेकहाँ से लाती हो तुम…?चीलों, गिद्दों और बाज़ की…
हिंदी का वैश्विक मंच
सुनो अमीनी दरख़्त की डाल…ऊंची फुनगी पे बैठीगौरैया से बतियातीअपनी जिज्ञासा रोक नहीं पायी…इक दिन सवाल कर ही बैठी… उड़ान के हौंसलेकहाँ से लाती हो तुम…?चीलों, गिद्दों और बाज़ की…
औरतें खिलखिलाती धूप सीऔरतेंअलसुबह चूल्हे को लीपतीगुनगुनाती हैंअलसाई तंद्रा को भगानेखदबदाते पानी के धुएँ मेंतलाशती हैंखुशियों की फरमाइशेंऔरनन्हें हाथों मेंचाँद सी रोटी थमाबोसा लेकेभरपूर मुस्कुराती हैं। पूरे दिन कोठेंगा दिखाचल…
आहट सर्द रातों मेंकोहरे को चीरतीएक सुलगी सी आहटबेलाग लिपट जाती हैबारंबार कुनकुनी धूप कोअपनी दोहर में लपेटे..! कभीचादर की सलवटों मेंउदासी की संतप्त सांसेंबीतने नहीं देतींसिरफिरी ख्वाहिशों कोउनकी उद्दाम…
युयुत्सु किसने चाहा युयुत्सु बनना..?सत्य के पक्ष में डटे रहनासमय की नंगी तलवार पे चलनावो भी बिना डगमगाए…!!!कुछसत्ता के पक्षधरअक्सर प्रश्नों के बवंडरउड़ा देते हैंआँखों में धूल की मोटी परत…
संतचरित्रकार संत कवि महीपती मराठी संत कवी व संत चरित्रकार महिपती ने उत्तर भारत और महाराष्ट्र के अनेक संतों का परिचय ‘भक्तविजय ‘ मराठी ग्रंथ द्वारा प्रदान किया है। जिसका…
जगद्गुरु संत तुकाराम ~ विजय नगरकर, अहमदनगर, महाराष्ट्र पंढरपुर स्थित विठ्ठल भगवान के वारकरी संप्रदाय के प्रमुख संतों में संत तुकाराम का नाम बहुत आदरपूर्वक लिया जाता है। संत तुकाराम…
भारत एकता आधार शंकरा परिचय जब सनातन हो रहा था खंड खंड हो पाखंड से बाधितजब बौद्ध धर्म प्रतिक्रिया से वह हो रहा था अपमानिततब पुनः करने वेद शास्त्र पुराण…
महाकुंभ: ज्ञान, भक्ति व आस्था का संगम – शशिकांत कुंभ सदियों से भारतीय जन मानस की धार्मिक आस्था व संवेदनाओं से जुड़ा रहा है। इस तरह के आयोजनों के पीछे…
मॉरीशस देश में महाशिवरात्रि का पर्व (– सुनीता पाहूजा) महाशिवरात्रि का पर्व भारत में अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। वर्षभर में 12 शिवरात्रियाँ होती हैं परंतु इनमें महाशिवरात्रि…
शिव विरोधाभासी प्रतीकों के परे हैं – अनिल जोशी मेरा भी पहला संपर्क शिव से रामकथा के माध्यम से आया आता है। रामकथा में हम पाते हैं कि रावण पर…
रुद्रावतार भगवान भुवन-भास्कर का मुख झलका पूरब की दिशा हुई रक्तिमलहरियाँ उठीं मद्धिम-मद्धिम शिव समाधिस्थ थे, ध्यान कलश छलका भगवान भुवन-भास्कर का मुख झलका देखा__धर्म की ध्वजा है जीर्ण-शीर्ण अहसास…
छायावाद हिंदी साहित्य के उत्थान की काव्य-धारा – डॉ अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश हिन्दी साहित्य के आधुनिक काल में द्विवेदी युग के बाद के काल को छायावादी युग…
एक नयी सिन्ड्रेला – डॉ संतोष गोयल सिन्ड्रेला की कहानी उसके प्रिय राजकुमार के आने तथा अपने साथ अपने घर ले जाने के बाद समाप्त हो जाती है, पर मेरी…
कवि अनिल शर्मा ‘जोशी’ की ‘नींद कहाँ है’ की समीक्षा – मनीष पाण्डेय अनिल शर्मा ‘जोशी’ वैश्विक स्तर पर हिंदी भाषा और साहित्य जगत के जाने माने नाम हैं। भारत…
महाकुंभ : सनातन का विराट उत्सव – नरेश शांडिल्य (एक यात्री, जिसके कंधे पर दो बैग टंगे हैं) : कहां से है आ रहे हो? मधुबनी से कैसे आए? ट्रेन…
पहाड़ों के बीच धर्मों का संगम : राजगीर डॉ वरुण कुमार दिल्ली आने के बाद मैं जब भी मैं अपने कोलकातावासी मित्र अनिल जी से पूछता हूँ – “कहीं गए?”…
विचारों की भीड़ (वार्तालाप) -इन्द्रा (धीर) वड़ेहरा प्रश्न :याद आते हैं दादा जी के शब्द जो अक्सर दोहराया करते थे : “ध्यान करने बैठो, साधना होने लगेगी।” ध्यान और साधना…
https://youtu.be/sDcpca61eAo
https://youtu.be/5XveKuPRFAs
गुजराती और हिंदी के अंतर्संबंध – (आलोक गुप्त : पूर्व प्रोफेसर, गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय एवं पूर्व फेलो, भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला) इस लेख में गुजराती और हिंदी के संबंध…